गंगासागर : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में आयोजित विश्व प्रसिद्ध गंगासागर मेले में एक गंभीर और चिंताजनक अग्निकांड की घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दो नंबर घाट के समीप स्थित अस्थायी कैंप में तड़के करीब सुबह 4 बजे अचानक भीषण आग लग गई। इस आग की चपेट में आकर मेले में लगे कई अस्थायी टेंट पूरी तरह जलकर राख हो गए।
आग इतनी तेज़ी से फैली कि कुछ ही मिनटों में उसने आसपास के क्षेत्र को अपनी गिरफ्त में ले लिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग की दो गाड़ियाँ तथा मोटरसाइकिल फायर पंप तत्काल मौके पर भेजे गए। आग पर काबू पाने के लिए दमकलकर्मियों को काफी देर तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। एहतियात के तौर पर आसपास के इलाके को तुरंत खाली कराया गया, ताकि किसी बड़े जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।
घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें और वीडियो आग की भयावहता को साफ तौर पर बयां करती हैं। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी श्रद्धालु के घायल या हताहत होने की आधिकारिक सूचना नहीं है, लेकिन यह घटना प्रशासनिक तैयारियों पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक दिन पहले ही राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के आउटराम घाट से गंगासागर मेले का औपचारिक उद्घाटन किया था, और उसके अगले ही दिन मेले के एक महत्वपूर्ण हिस्से में इस तरह की बड़ी दुर्घटना का होना, सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक सतर्कता पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है।
सूत्रों के अनुसार, आधिकारिक रूप से आमंत्रित मीडियाकर्मियों सहित देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का आगमन अभी शुरू ही होने वाला है। ऐसे में यह अग्निकांड स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई है। अस्थायी टेंटों में अग्नि-सुरक्षा मानकों की अनदेखी, अव्यवस्थित विद्युत वायरिंग, गैस सिलेंडरों की लापरवाह व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों की कमी श्रद्धालुओं की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
यह घटना सरकार और प्रशासन के लिए एक कड़ा सबक है कि केवल उद्घाटन, प्रचार और दावों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी, पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और जवाबदेही से ही इतने विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
श्रद्धालुओं से अपील:
- अस्थायी टेंटों में खुले आग या गैस के उपयोग से पूरी तरह बचें
- आग की गंध, धुआं या कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस या प्रशासन को सूचना दें
- भीड़भाड़ वाले इलाकों में सतर्क रहें और आपात निकास मार्गों की पहले से जानकारी रखें
गंगासागर मेला आस्था का पर्व है, लेकिन आस्था के नाम पर सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद खुलेगी।
