कोलकाता : इस वर्ष कुंभ मेला आयोजित न होने के कारण गंगासागर मेला 2025 में देशभर से रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने सुरक्षा, निगरानी और आधारभूत ढांचे को लेकर अब तक की सबसे व्यापक तैयारियां की हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम तीर्थ अनुभव मिल सके।
मेला क्षेत्र और मुरीगंगा नदी पर पहली बार बड़े पैमाने पर थर्मल इमेजिंग और नाइट-विजन ड्रोन तैनात किए जाएंगे, जिससे चौबीसों घंटे हवाई निगरानी संभव होगी। इसके साथ ही एक अत्याधुनिक पिलग्रिम ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PTMS) लागू किया गया है, जिसके तहत क्षेत्र में चलने वाली सभी बसों, एंबुलेंसों, जहाजों, बार्ज और लॉन्च की लाइव लोकेशन ट्रैक की जाएगी। जलमार्ग पर किसी भी वाहन के निर्धारित मार्ग से भटकते ही तुरंत अलर्ट सिस्टम सक्रिय हो जाएगा।
भीड़ प्रबंधन को मजबूत करने के लिए करीब 1,200 सीसीटीवी कैमरे प्रमुख स्थानों पर लगाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुव्यवस्थित रखने के लिए लोहे और अस्थायी बैरिकेड, तथा मुख्य सड़कों, मेला क्षेत्रों और सुविधाओं तक दिशा–सूचक संकेतक लगाए जा रहे हैं।
दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी अरविंद कुमार मीणा ने बताया कि कोहरे की संभावित चुनौती को ध्यान में रखते हुए लॉट 8 से कचुबेड़िया तक मुरीगंगा नदी के किनारे हाई-इंटेंसिटी लाइटें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा, नदी में स्थित बिजली विभाग के टावर को भी रोशन किया गया है और ड्रेज किए गए नौवहन चैनल को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया गया है, ताकि जलयान मार्ग से न भटकें।
प्रशासन ने गंगासागर मेला 2026 की तैयारी भी अभी से शुरू कर दी है। सागर द्वीप पर हो रहे तेज तटीय कटाव (इरोशन) को देखते हुए, लगभग 70 प्रतिशत श्रद्धालुओं की आवाजाही को बीच नंबर 1 की ओर मोड़ने का प्रस्ताव है। इसके तहत बीच 1A से बीच 1 को जोड़ने के लिए 450 मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा अस्थायी मार्ग बनाया जा रहा है, जिससे स्नान के बाद श्रद्धालु सुरक्षित रूप से कपिल मुनि मंदिर तक पहुंच सकें।

सुंदरबन पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. कोटेश्वर राव ने बताया कि सागर में नया बस स्टैंड विकसित किया गया है, जिससे कचुबेड़िया तक श्रद्धालुओं की आवाजाही और अधिक सुचारु होगी। सुरक्षा व्यवस्था में वॉच टावर, मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग, ड्रॉप गेट, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी, एंटी-क्राइम टीमें और रैपिड रिस्पॉन्स मोबाइल यूनिट्स शामिल होंगी।
आपदा प्रबंधन के लिए करीब 2,500 सिविल डिफेंस स्वयंसेवक, क्विक रिस्पॉन्स टीमें, डीप डाइवर, भारतीय नौसेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और कोस्ट गार्ड की तैनाती की जाएगी। इससे किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। मेला क्षेत्र में बेहतर सफाई व्यवस्था, साथ ही हवाई और जल एंबुलेंस को मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयार रखा जाएगा।
गंगासागर मेला 8 जनवरी से 17 जनवरी तक आयोजित होगा, जबकि पवित्र स्नान 14 जनवरी को दोपहर 1:14 बजे से 15 जनवरी को दोपहर 1:14 बजे तक होगा।
आधुनिक तकनीक, बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और दूरदर्शी योजना के माध्यम से प्रशासन का उद्देश्य आस्था, सुरक्षा और सुव्यवस्था के बीच संतुलन बनाना है, ताकि गंगासागर मेला भारत के सबसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित धार्मिक आयोजनों में शामिल हो सके।
