नई दिल्ली: शांति का संदेश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की छह दशक लंबी यात्रा पूरी होने के अवसर पर राज विद्या केंद्र, दिल्ली की ओर से द्वारका स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में तीन दिवसीय विशेष समारोह आयोजित किया गया। 31 जुलाई, 1 अगस्त और 2 अगस्त 2026 को आयोजित कार्यक्रमों में हजारों लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम देखा।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रेम रावत ने कहा कि मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल बाहरी सफलता, धन या प्रतिष्ठा हासिल करना नहीं है, बल्कि अपने भीतर मौजूद शांति और आनंद को पहचानना है। उनके अनुसार दुनिया में सुविधाएं और संसाधन लगातार बढ़े हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप और जीवन के उद्देश्य से दूर होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां और चुनौतियां हमेशा बदलती रहेंगी, लेकिन यदि व्यक्ति अपने भीतर की शांति से जुड़ा रहे तो बाहरी परिस्थितियां उसके जीवन के आनंद को प्रभावित नहीं कर सकतीं। उनका संदेश रहा कि जिस शांति की तलाश दुनिया में की जा रही है, उसका स्रोत प्रत्येक व्यक्ति के भीतर मौजूद है।
आठ वर्ष की उम्र में संभाली शांति संदेश की जिम्मेदारी
प्रेम रावत का जन्म 10 दिसंबर 1957 को हरिद्वार के कनखल में हुआ था। आयोजकों के अनुसार, उन्होंने चार वर्ष की उम्र से ही अपने पिता और गुरु हंस जी महाराज के साथ सार्वजनिक सभाओं में लोगों को संबोधित करना शुरू कर दिया था।
आठ वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने शांति के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उनकी यात्रा भारत से निकलकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंची।
महज 13 वर्ष की उम्र में उनकी पहली विदेश यात्रा लंदन की हुई। इसके बाद उन्हें विभिन्न देशों से कार्यक्रमों में संबोधन के लिए निमंत्रण मिलने लगे। शांति का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने पायलट का प्रशिक्षण भी लिया।
69 देशों के 457 से अधिक शहरों में संबोधन
आयोजकों के मुताबिक, छह दशक की इस यात्रा के दौरान प्रेम रावत ने 69 देशों के 457 से अधिक शहरों में लोगों को संबोधित किया है। यूके की संसद, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और यूरोपियन यूनियन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्होंने अपने विचार रखे हैं।
भारत में भी उन्होंने आईआईटी दिल्ली, आईआईएम अहमदाबाद सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में लोगों को संबोधित किया है।
शांति और मानवीय कार्यों से जुड़े प्रयासों के तहत ‘फूड फॉर पीपल’, प्राकृतिक आपदा राहत, निशुल्क नेत्र शिविर और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं।
पीस एजुकेशन प्रोग्राम 84 से अधिक देशों में
प्रेम रावत से जुड़े ‘पीस एजुकेशन प्रोग्राम’ के माध्यम से आंतरिक शांति और जीवन की समझ को लेकर लोगों को जागरूक किया जाता है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम दुनिया के 84 से अधिक देशों और 45 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है तथा जेलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, पुनर्वास केंद्रों और सामुदायिक संगठनों में संचालित किया जाता है। अब तक 7 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए हैं।
उनके प्रयासों को लेकर उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं। वर्ष 2012 में उन्हें ब्रांडलॉरिएट लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। वर्ष 2025 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद की ओर से उन्हें डॉक्टर ऑफ लेटर्स की मानद उपाधि प्रदान की गई। उनके नाम तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स भी दर्ज हैं।
संगीत प्रस्तुति रही समारोह का आकर्षण
तीन दिवसीय समारोह के दौरान प्रेम रावत की विशेष संगीतमय प्रस्तुति भी आयोजित की गई, जिसे कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सराहा। इस अवसर पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से शुभकामना और बधाई संदेश भी प्राप्त हुए।
समारोह के माध्यम से छह दशक की शांति यात्रा को याद करते हुए एक बार फिर यही संदेश सामने रखा गया कि शांति किसी बाहरी स्थान पर खोजने की चीज नहीं, बल्कि व्यक्ति के अपने भीतर मौजूद अनुभव है।
प्रेम रावत की छह दशक लंबी यात्रा का केंद्रीय संदेश भी इसी विचार के इर्द-गिर्द रहा है— “जिस शांति की तुम्हें तलाश है, वह तुम्हारे अंदर है।”
