कोलकाता: चितरंजन दास कॉलेज, कोलकाता एवं सदीनामा पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में महान स्वतंत्रता सेनानी देशबंधु चितरंजन दास की स्मृति में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज परिसर स्थित आईसीटी हॉल में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. कना मणि मुखर्जी के स्वागत भाषण से हुआ।
विशिष्ट वक्ताओं में अलीपुर वार्ता के संपादक जयंत चौधरी, कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पारोमिता दास तथा सदीनामा के संपादक जितेंद्र जितांशु शामिल रहे।
इतिहास और योगदान पर प्रकाश
वक्ताओं ने देशबंधु दास के बहुआयामी योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि वे अलीपुर बम कांड के प्रमुख वकील थे, जहाँ अरविंदो घोष मुख्य अभियुक्त थे। इसके साथ ही उन्होंने मुजफ्फरपुर बम कांड में भी क्रांतिकारियों की वकालत की।
- वे कांग्रेस के 1921 के अहमदाबाद अधिवेशन के अध्यक्ष रहे।
- 1923 में लाहौर इंटक तथा 1924 में अहमदाबाद अधिवेशन की अध्यक्षता की।
- असहयोग आंदोलन की वापसी के बाद कांग्रेस के भीतर उभरे मतभेदों के चलते उन्होंने 1923 में स्वराज पार्टी का गठन किया। इस पार्टी की स्थापना में मोतीलाल नेहरू भी उनके साथ थे।
- स्वराज पार्टी ने बंगाल में चुनावी सफलता प्राप्त की, किंतु देशबंधु दास ने मुख्यमंत्री का पद स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
वक्ताओं के विचार
- जितेंद्र जितांशु ने कहा कि दास जी का मुख्यमंत्री पद ठुकराना उनके आदर्शवादी दृष्टिकोण का उदाहरण था।
- डॉ. पारोमिता दास ने बताया कि कॉलेज का नामकरण देशबंधु के सम्मान में किया गया है। उन्होंने उनके आंदोलनों, जन्म-मृत्यु काल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ उनके संबंधों पर विस्तृत चर्चा की।
- जयंत चौधरी ने उन्हें एक कुशल बैरिस्टर बताते हुए कहा कि उन्होंने अरविंदो घोष समेत कई क्रांतिकारियों की कानूनी सहायता की। नेताजी उन्हें अपना पहला गुरु मानते थे और दोनों के बीच संबंध अत्यंत मधुर थे।
अन्य आयोजन
सेमिनार का संचालन अजय राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सिद्धेश्वर ने प्रस्तुत किया। मंच पर मीनाक्षी सांगानेरिया को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्राध्यापक एवं विद्वान उपस्थित थे, जिनमें एस. रॉय, एस. बनर्जी, आर. लाहिड़ी, ए.एस. गंगोपाध्याय, ए.के. दास, स्वागता रक्षित, राजेश कुमार साव, शाहबाना खातून तथा नौविका बसु प्रमुख रहे।
