कोलकाता: काली पूजा के दौरान पटाखे जलाने को लेकर कोलकाता के डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि पटाखों से जलने की घटना को मामूली समझकर नजरअंदाज करना या बिना चिकित्सकीय सलाह के घरेलू नुस्खे अपनाना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। समय पर सही प्राथमिक उपचार और मेडिकल जांच से चोट की गंभीरता और जटिलताओं को कम किया जा सकता है।
पिछले साल दिवाली और काली पूजा के दौरान कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में पटाखों से जलने के कई मामले सामने आए थे। इनमें हाथों में मामूली चोट से लेकर अस्पताल में भर्ती किए जाने तक की स्थिति शामिल थी। एक अस्पताल में एक ही दिन में 10 से अधिक बर्न इंजरी के मरीज पहुंचे थे, जबकि दूसरे अस्पताल में दो रातों के दौरान हाथ जलने के आठ मामलों का इलाज किया गया था।
आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता के सीनियर कंसल्टेंट (जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) डॉ. देबाशीष देब ने बताया कि पटाखों से जलने के बाद कई लोग पहले घरेलू उपचार करने की कोशिश करते हैं और डॉक्टर के पास पहुंचने में देरी करते हैं। यह लापरवाही चोट को और गंभीर बना सकती है।
डॉ. देब के मुताबिक, जली हुई त्वचा पर टूथपेस्ट, घी, तेल या मक्खन लगाने से बचना चाहिए। इसी तरह सीधे बर्फ लगाने से भी प्रभावित ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है। जलने पर सबसे पहले प्रभावित हिस्से को ठंडे बहते पानी के नीचे रखना चाहिए और चोट की गंभीरता के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
पटाखों से जलने पर कितना गंभीर हो सकता है नुकसान?
पटाखों से निकलने वाली आग, चिंगारी और गर्म मलबा त्वचा के साथ-साथ अंदरूनी ऊतकों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। चोट की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि जलन कितनी गहरी है और त्वचा कितनी देर तक गर्मी या आग के संपर्क में रही।
गंभीर मामलों में रक्त वाहिकाओं, नसों और आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे हाथों, उंगलियों और जोड़ों की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। चेहरे, हाथ, पैर, प्राइवेट पार्ट और बड़े जोड़ों में लगी जलन को विशेष रूप से गंभीरता से लेने की जरूरत होती है। कुछ मामलों में विशेष ड्रेसिंग, क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाने और सर्जरी तक की आवश्यकता पड़ सकती है।
फर्स्ट एड के दौरान इन गलतियों से बचें
डॉक्टरों के अनुसार, जलने के बाद टूथपेस्ट, घी, तेल, मक्खन या अन्य घरेलू चीजें लगाना आम गलतियों में शामिल है। जली हुई त्वचा पर सीधे बर्फ लगाना, फफोले फोड़ना और घाव पर चिपके कपड़ों को जबरन खींचना भी नुकसानदायक हो सकता है।
इसके अलावा, शुरुआत में चोट मामूली दिखाई देने के बावजूद मेडिकल जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। कई बार जलन की वास्तविक गंभीरता तुरंत समझ में नहीं आती।
पटाखों से जलने पर तुरंत क्या करें?
- सबसे पहले घायल व्यक्ति को आग और पटाखों से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
- प्रभावित हिस्से को लगभग 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें।
- जली हुई त्वचा पर बर्फ, टूथपेस्ट, घी या तेल न लगाएं।
- त्वचा से नहीं चिपके गहने और कपड़े सावधानी से हटा दें।
- घाव पर चिपके कपड़ों को खींचकर न निकालें।
- ठंडा करने के बाद घाव को साफ, न चिपकने वाली ड्रेसिंग से ढकें।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के क्रीम या एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल न करें।
किन स्थितियों में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी?
चेहरे, हाथ, पैर या बड़े जोड़ों में जलने, गहरे घाव, आंखों में पटाखे से चोट लगने और सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।
त्वचा का सफेद या काला पड़ना और प्रभावित हिस्से में संवेदना कम होना भी गंभीर जलन के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा घाव में बढ़ती लालिमा, सूजन, पस, तेज दर्द या बुखार होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
काली पूजा में पटाखे जलाते समय बरतें सावधानी
डॉक्टरों ने लोगों को खुले स्थानों पर पटाखे जलाने, सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और पटाखों से उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। बच्चों को हमेशा बड़ों की निगरानी में ही पटाखे जलाने चाहिए। बिना फटे पटाखों को दोबारा जलाने या हाथ लगाने से बचना चाहिए। आसपास पानी या उपयुक्त अग्निशमन उपकरण रखना भी जरूरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि काली पूजा के उत्सव के दौरान थोड़ी सी लापरवाही गंभीर चोट का कारण बन सकती है। इसलिए पटाखे जलाते समय सावधानी बरतने के साथ-साथ किसी भी तरह की जलन होने पर सही फर्स्ट एड और समय पर इलाज को प्राथमिकता देनी चाहिए।
